Youngistan of Purvanchal

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जब मैं ट्रैफिक में बाइक चला रहा होता हूँ और
थोड़ी ज्यादा भीड़ रहती है इसलिए स्पीड कम
रखनी पड़ती है तभी पीछे से एक तेज तर्रार हॉर्न
सुनाई देता है...बार बार लगातार। नहीं नहीं ये
हॉर्न एम्बुलेंस का नहीं है...पीछे देखने पर पाता हूँ
तो एक दिव्य तेज प्रकाश में समाई छवि के दर्शन
होते है। 16-17 साल का लड़का, आँखों पर मीना
बाज़ार में 23 रु जोड़े में मिलने वाले बेहूदा चश्मे,
कानो में आधा क्विंटल भारी बालियां,
हाथो में सलमान खान का ब्रेसलेट पहने युवा
जिसकी शक्ल देखकर चमगादड़ और मनुष्य में फर्क
करना मुश्किल होता है वो रेड कलर की पल्सर
बाइक ने बैठकर हॉर्न बजा रहा होता है। उसे आगे
जाना है...मुझसे पहले, हम सब से पहले। भले ही जगह
ना हो, सड़क में भीड़ हो, सामने से बच्चे आ रहे हो
लेकिन उसे तेज गति से आगे जाना है क्योंकि अगले
मोड़ में ओबामा उसके साथ चाय-सुट्टा पीने के
लिए इंतज़ार कर रहे होते है।
मैं ऐसे लोगो पर खीझ ना खाता, एक लंबी
चौड़ी मुस्कान देकर उन्हें आगे जाने का रास्ता
प्रदान करता हूँ। दरअसल ये लोग भगवान् के भेजे हुए
दूत होते है जो खुद का एक्सीडेंट करवा के हमें
समझा जाते है कि बाइक धीरे चलावे। ये लोग
सामने खड़ी मौत को गले लगाकर हमारी जान
बचा जाते है। ये लोग एक्सीडेंट में खुद के प्राण
त्याग कर समाज को शिक्षा दे जाते है कि
हेलमेट पहनना क्यों जरुरी है। अत: ऐसा कोई भी
बंदा मिले तो उससे नफ़रत से नहीं स्नेह की दृष्टि
से देखे। धन्यवाद।
प्रवचन समाप्त।
दानपेटी में लाइक और कमेन्ट का दान करे और
पुण्य कमाए।😄😜

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Lol :D

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वो भीं दिन थे...
जब घड़ी एक आध के पास होती थी और समय सबके पास होता था।
बोलचाल में राजस्थानी का इस्तेमाल हुआ करता था और हिंदी सिर्फ शहरों तक सिमित थी और अंग्रेज़ी तो पिने के बाद ही बोली जाती थी।
हर जगह खो खो, कबड्डी खेलते थे अब केवल संसद में खेली जाती है।
लोग भूखे उठते थे पर भूखे सोते नहीं थे।
फिल्मों में हिरोइन को पैसे कम मिलते थे पर कपड़े पूरे पहनती थी।
लोग पैदल चलते थे और पदयात्रा करते थे पर पदयात्रा पद पाने के लिये नहीं होती थी।
साईकिल होती थी जो चार रोटी में चालीस का एवरेज देती थी।
चिट्ठी पत्री का जमाना था पत्रों मे व्याकरण अशुद्ध होती थी पर आचरण शुद्ध हुआ करता था।
शादी में घर की औरतें खाना बनाती थी और बाहर की औरतें नाचती थी अब घर की औरतें नाचती हैं और बाहर की औरते खाना बनाती है।
अब सोचो हमने क्या पाया और क्या खोया....

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